BJP को बड़ा सियासी झटका, कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव! मंत्री खुशवंत साहब के बड़े भाई ने थामा कांग्रेस का ‘हाथ’, सतनामी वोट बैंक पर बढ़ी हलचल

रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की राजनीति में चुनाव से करीब दो साल पहले ही बड़े सियासी समीकरण बनने लगे हैं। गुरु बालदास के बड़े बेटे और मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई ढाल दास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली।
ढाल दास की कांग्रेस में एंट्री को सतनामी समाज के बीच कांग्रेस की बड़ी राजनीतिक पहल माना जा रहा है। खास तौर पर इसलिए कि गुरु बालदास का सतनामी समाज में प्रभाव रहा है और उनके परिवार का राजनीतिक जुड़ाव पहले से ही चर्चा में रहा है।
कांग्रेस ने चला बड़ा सियासी दांव
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने के बाद भूपेश बघेल ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ढाल दास के कांग्रेस में आने से पार्टी को मजबूती मिलेगी और कांग्रेस अपने सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ेगी।
कांग्रेस के इस कदम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश सतनामी वोट बैंक को लेकर माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ की करीब 20 विधानसभा सीटों पर सतनामी समाज का प्रभाव चुनावी समीकरण बदलने की ताकत रखता है। ऐसे में चुनाव से पहले इस समाज से जुड़े प्रभावशाली चेहरे को अपने साथ जोड़ना कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
मंत्री खुशवंत साहेब के भाई ने थामा कांग्रेस का हाथ
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने से मामला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि उनके छोटे भाई खुशवंत साहेब बीजेपी सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में एक ही परिवार के दो प्रमुख चेहरों का अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ होना छत्तीसगढ़ की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।
20 सीटों पर नजर, 2028 से पहले सियासी बिसात
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव अभी करीब दो साल दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने शुरू कर दिए हैं। सतनामी समाज राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी करीब 14 प्रतिशत है।
ऐसे में ढाल दास की कांग्रेस में एंट्री को सिर्फ पार्टी सदस्यता नहीं, बल्कि 2028 के चुनाव से पहले सतनामी समाज के बीच कांग्रेस की पैठ बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि ढाल दास की कांग्रेस में एंट्री का सतनामी समाज की राजनीति पर कितना असर पड़ेगा और बीजेपी इस सियासी घटनाक्रम का जवाब किस रणनीति से देती है।
